आस्थाऋषिकेश

ऋषिकेश के विभिन्न आश्रमों में धूमधाम से बनाया गया गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व।

 

बाइट:–श्री कृष्णाचार्य जी महाराज कृष्ण कुंज आश्रम मायाकुंड।

बाइट:–जयराम आश्रम ऋषिकेश के महंत।

 

बाइट:–केशव स्वरूप महाराज मायाकुंड ऋषिकेश।

ऋषिकेश। गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और आत्मचिंतन का महापर्व है। भारतीय संस्कृति में गुरु को वह स्थान प्राप्त है जो अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है। इस वर्ष गुरु पूर्णिमा ऐसे समय में मनाई जा रही है, जब देश सामाजिक, तकनीकी और नैतिक स्तर पर अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। इस अवसर पर समाज को यह विचार करने की आवश्यकता है कि क्या हम वास्तव में अपने गुरुओं के बताए मार्ग पर चल रहे हैं।

गुरु पूर्णिमा हमें यह संदेश देती है कि केवल तकनीकी प्रगति ही पर्याप्त नहीं है। राष्ट्र की वास्तविक उन्नति तब संभव है, जब उसके नागरिक सत्य, अनुशासन, सेवा, सहिष्णुता और मानवता जैसे मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएँ। परिवार, शिक्षक, माता-पिता और समाज के अनुभवी लोग आज भी नई पीढ़ी के सबसे बड़े मार्गदर्शक हैं।

महर्षि वेदव्यास की स्मृति में मनाया जाने वाला यह पर्व हमें भारतीय ज्ञान परंपरा की याद दिलाता है। गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला प्रेरणास्रोत होता है। गुरु पूर्णिमा का वास्तविक संदेश यही है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में सीखने की भावना बनाए रखे और ज्ञान का उपयोग समाज तथा राष्ट्र के कल्याण के लिए करे।

आज आवश्यकता इस बात की है कि हम मतभेदों से ऊपर उठकर संवाद, सद्भाव और जिम्मेदार नागरिकता को अपनाएँ। यदि भारत का प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करे और गुरुजनों के आदर्शों को जीवन में उतारे, तो देश विकास के साथ-साथ नैतिक रूप से भी विश्व के लिए एक आदर्श बन सकता है।

गुरु पूर्णिमा का संदेश स्पष्ट है— “ज्ञान ही वह प्रकाश है जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र तीनों का भविष्य उज्ज्वल बनाता है।

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