आस्थाऋषिकेश

दीपावली केवल दिखावे का नहीं, बल्कि सुख-शांति और भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़ने का पर्व है।

उत्तराखंड पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी जी महराज/ कृष्णाचार्य जी महाराज, श्री कृष्ण कुंज आश्रम मायाकुंड।

 

बाइट:–उत्तराखंड पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी जी महराज /कृष्णाचार्य जी महाराज, श्री कृष्ण कुंज आश्रम मायाकुंड।

ऋषिकेश। दीपावली के पावन पर्व पर समस्त देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और जीवन के मूल तत्वों को समझने का संदेश दिया गया। इस अवसर पर कहा गया कि दीपावली केवल दीप जलाने, आतिशबाजी करने और भौतिक सुख-सुविधाओं के प्रदर्शन का पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मिक शांति, समृद्धि और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का महापर्व है।

 

उन्होंने कहा कि आज प्रत्येक व्यक्ति सुख और शांति की तलाश में है। दुनिया के कई संपन्न देशों में भी अशांति और तनाव देखने को मिलता है। इससे स्पष्ट होता है कि केवल भौतिक संपन्नता और बाहरी दिखावे से वास्तविक सुख-शांति प्राप्त नहीं की जा सकती। हमारे ऋषि-मुनियों ने सदियों पहले साधना और आध्यात्मिक चिंतन के माध्यम से मानव जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया था।

 

उन्होंने दीपावली के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान इसी पावन अवसर पर माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इसलिए दीपावली माता लक्ष्मी के स्वागत, आराधना और समृद्धि का विशेष पर्व है। हमें इस पर्व के वास्तविक आध्यात्मिक संदेश को समझना चाहिए और भौतिकवाद की दौड़ में अपनी संस्कृति तथा परंपराओं को नहीं भूलना चाहिए।

 

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय संस्कृति की मूल जड़ों में गौमाता का विशेष स्थान है। जिस प्रकार किसी वृक्ष की मजबूती उसकी जड़ों पर निर्भर करती है, उसी प्रकार भारतीय संस्कृति की आत्मा में गौसंरक्षण और गोसेवा का महत्वपूर्ण स्थान है। दीपावली के अगले दिन मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा भी प्रकृति, गौवंश और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति हमारी श्रद्धा का प्रतीक है।

 

उन्होंने संदेश देते हुए कहा कि गोवर्धन होगा तो देश का वर्धन होगा और गोवंश का पतन हुआ तो देश के सांस्कृतिक मूल्यों का भी पतन होगा। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को गोसेवा, गौसंरक्षण और भारतीय परंपराओं के संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए।

 

अंत में उन्होंने सभी देशवासियों से अपील की कि दीपावली को केवल बाहरी उत्सव तक सीमित न रखें, बल्कि इसके मूल भाव को आत्मसात करें। अपने घरों में दीप जलाने के साथ-साथ अपने जीवन में भी प्रेम, सद्भाव, सेवा और आध्यात्मिकता का प्रकाश फैलाएं।

 

जय श्री कृष्ण। समस्त देशवासियों को शुभ दीपावली की हार्दिक मंगलकामनाएं।

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