नगर पंचायत तपोवन में बिना सहमति स्मार्ट मीटर लगाने पर विवाद, राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।
टिहरी बांध उत्तराखंड में होने के बाद भी राज्य सरकार नहीं दे रही कोई लाभ स्थानीय जनता को।
बिना पहचान पत्र दिखाए लोगो के घर में घुसते अज्ञात लोग।
नगर पंचायत तपोवन क्षेत्र में आज उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब कुछ अज्ञात व्यक्ति स्वयं को उत्तराखंड जल विद्युत निगम का कर्मचारी बताकर स्थानीय लोगों के घरों में स्मार्ट मीटर लगाने पहुंचे। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इन लोगों ने बिना उपभोक्ताओं की सहमति के जबरन स्मार्ट मीटर लगाने का प्रयास किया, जिससे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब स्थानीय जनता ने संबंधित व्यक्तियों से उनका पहचान पत्र, विभागीय आदेश अथवा कोई वैध प्रमाण पत्र दिखाने को कहा, तो वे कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए। इसके बाद लोगों ने स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया का विरोध शुरू कर दिया और पूरे मामले पर सवाल खड़े किए।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में यह स्पष्ट किया गया था कि उपभोक्ता की सहमति के बिना किसी के घर में स्मार्ट मीटर नहीं लगाया जा सकता। ऐसे में बिना अनुमति और बिना किसी वैध पहचान के लोगों के घरों में मीटर लगाने पहुंचना सीधे तौर पर उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन माना जा रहा है।
क्षेत्रवासियों ने राज्य सरकार और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए हैं। लोगों का कहना है कि उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां टिहरी बांध जैसी विशाल जल विद्युत परियोजना मौजूद है और प्रदेश बिजली उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, वहां आम जनता को लगातार बढ़े हुए बिजली बिलों का सामना करना पड़ रहा है। जनता का आरोप है कि सरकार एक ओर स्मार्ट मीटर के नाम पर लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है, वहीं दूसरी ओर बिजली दरों में लगातार वृद्धि से आम उपभोक्ता परेशान है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सरकार पहले स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाए, अधिकृत कर्मचारियों की स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करे तथा उपभोक्ताओं की सहमति के बिना किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगाए। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि बिजली बिलों में हो रही बढ़ोतरी की स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर पंचायत तपोवन में स्मार्ट मीटर को लेकर बहस और तेज हो गई है तथा लोग राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं।



