तपोवन घाट की दुकानों में शराबखोरी: आस्था पर आघात, प्रशासन मौन।




ऋषिकेश के तपोवन क्षेत्र में स्थित सार्वजनिक तपोवन घाट, जिसे गंगा आस्था और आध्यात्म का प्रमुख केंद्र माना जाता है, इन दिनों एक गंभीर समस्या से जूझ रहा है। नगर पंचायत तपोवन की देखरेख में बनी दुकानों के भीतर खुलेआम शराबियों द्वारा मदिरा सेवन किए जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे न केवल गंगा की पवित्रता पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि स्थानीय लोगों और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की भावनाएं भी आहत हो रही हैं।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इन दुकानों का उपयोग व्यवसायिक गतिविधियों के बजाय अवैध शराबखोरी के अड्डों के रूप में किया जा रहा है। शाम होते ही यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है, जिससे घाट का माहौल असुरक्षित और अशोभनीय बन जाता है। श्रद्धालु, जो गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के लिए यहां आते हैं, ऐसे दृश्यों को देखकर खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर नगर पंचायत और स्थानीय प्रशासन की नजर इस ओर क्यों नहीं पड़ रही है? क्या यह लापरवाही है या फिर जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं? गंगा जैसे पवित्र स्थल पर इस तरह की गतिविधियां न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा रही हैं, बल्कि सरकार के ‘स्वच्छ और पवित्र गंगा’ के दावों की भी पोल खोल रही हैं।
सरकार और प्रशासन अक्सर गंगा स्वच्छता और पर्यटन को बढ़ावा देने की बातें करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आती है। यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है, जिससे क्षेत्र की छवि और पर्यटन दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे तत्वों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए, दुकानों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए और तपोवन घाट की गरिमा को बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। अब देखना यह है कि प्रशासन कब जागता है और गंगा की पवित्रता को बचाने के लिए क्या कदम उठाता है।



