तपोवन घाट की बदहाल सार्वजनिक शौचालय व्यवस्था पर उठे सवाल।



तपोवन घाट में जहां एक ओर प्रतिदिन भव्य गंगा आरती आयोजित होती है और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, वहीं दूसरी ओर घाट परिसर में बने सार्वजनिक शौचालय की बदहाल स्थिति स्थानीय प्रशासन और नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रही है।
नगर पंचायत तपोवन द्वारा राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से घाट परिसर में लगभग 17 दुकानों का आवंटन किया गया है। गंगा आरती के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से दान चढ़ावे एवं अन्य माध्यमों से नगर पंचायत को अच्छी आय भी प्राप्त होती है। लेकिन विडंबना यह है कि जिस स्थान को धार्मिक आस्था और पर्यटन का केंद्र माना जाता है, वहीं मूलभूत सुविधाएं बदहाली का शिकार बनी हुई हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि घाट परिसर में स्थित सार्वजनिक शौचालय लंबे समय से गंदगी, दुर्गंध और रखरखाव की कमी से जूझ रहा है। कई बार नगर पंचायत तपोवन को इसकी जानकारी दी गई, शिकायतें भी की गईं, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे तपोवन क्षेत्र की छवि भी धूमिल हो रही है।
लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत केवल राजस्व वसूली तक सीमित होकर रह गई है, जबकि आम जनता और श्रद्धालुओं की सुविधाओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। धार्मिक और पर्यटन स्थल होने के बावजूद यदि स्वच्छता जैसी बुनियादी व्यवस्था चरमराई रहेगी, तो यह प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण माना जाएगा।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि घाट परिसर के सार्वजनिक शौचालय की नियमित सफाई, मरम्मत और निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि गंगा तट की गरिमा बनी रहे और श्रद्धालुओं को स्वच्छ वातावरण मिल सके।



