ऋषिकेश के वन क्षेत्राधिकारी गंभीर सिंह धमांदा को मिली दोहरी जिम्मेदारी, लच्छीवाला रेंज का अतिरिक्त प्रभार सौंपा।


ऋषिकेश। वन विभाग ने ऋषिकेश रेंज के वन क्षेत्राधिकारी गंभीर सिंह धमांदा की कार्यकुशलता एवं लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें एक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। प्रभागीय वनाधिकारी देहरादून द्वारा जारी आदेश के अनुसार उन्हें लच्छीवाला रेंज के वन क्षेत्राधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। अब वे ऋषिकेश रेंज के साथ-साथ लच्छीवाला रेंज के कार्यों का भी संचालन करेंगे।
गौरतलब है कि गंभीर सिंह धमांदा वर्तमान में ऋषिकेश रेंज के रेंज अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वन विभाग द्वारा उन्हें अतिरिक्त प्रभार दिए जाने को उनके अनुभव, कार्यनिष्ठा और विभाग के प्रति समर्पण का सम्मान माना जा रहा है।
इस संबंध में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में वन क्षेत्राधिकारी गंभीर सिंह धमांदा ने कहा कि यह विभागीय व्यवस्था है और उच्चाधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देशों का अनुशासनपूर्वक पालन करना उनका नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि विभाग जो भी जिम्मेदारी सौंपेगा, उसका निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ किया जाएगा।
जिला गंगा संरक्षण समिति के नामित सदस्य एवं नगर निगम ऋषिकेश के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर पर्यावरणविद् डॉ. विनोद प्रसाद जुगलान ने इस अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वन विभाग द्वारा गंभीर सिंह धमांदा को दोहरी जिम्मेदारी सौंपा जाना उनके बढ़ते कद और कार्यक्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि नई जिम्मेदारी के साथ उनकी जवाबदेही भी बढ़ी है और उनसे और अधिक तत्परता एवं प्रभावी कार्यशैली की अपेक्षा की जाती है।
उल्लेखनीय है कि गंभीर सिंह धमांदा पिछले लगभग 40 वर्षों से वन विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उत्तराखंड राज्य गठन से पूर्व उन्होंने उत्तर प्रदेश वन विभाग में भी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान की हैं। वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनका अनुभव विभाग के लिए एक बड़ी पूंजी माना जाता है।
दोहरी जिम्मेदारी मिलने पर अंतर्राष्ट्रीय गढ़वाल महासभा के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. राजे सिंह नेगी सहित विभिन्न सामाजिक, पर्यावरणीय एवं जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए नई जिम्मेदारी के सफल निर्वहन की कामना की है। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि उनके नेतृत्व में दोनों रेंजों में वन संरक्षण एवं पर्यावरणीय गतिविधियों को और अधिक मजबूती मिलेगी।



