

ऋषिकेश/देहरादून।
उत्तराखंड में बहुचर्चित अंकिता हत्याकांड को लेकर न्याय की मांग अब एक बार फिर सड़कों पर दिखाई देने लगी है। विभिन्न सामाजिक संगठनों, विपक्षी दलों और जनआक्रोश के चलते आज राज्य बंद का व्यापक असर कई जिलों में देखने को मिल रहा है। बंद के आह्वान के बाद प्रदेश के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में जनजीवन आंशिक रूप से ठप हो गया है।
इन जिलों में दिखा बंद का असर
राज्य बंद का प्रभाव देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार, पौड़ी, टिहरी, नैनीताल और अल्मोड़ा सहित कई जिलों में देखा गया।
कई स्थानों पर बाज़ार बंद रहे
स्कूल-कॉलेजों में उपस्थिति कम रही
सार्वजनिक परिवहन आंशिक रूप से प्रभावित हुआ
कुछ क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों ने जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी की
ऋषिकेश और श्रीनगर जैसे क्षेत्रों में सुबह से ही पुलिस बल तैनात रहा ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
क्या है प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग
प्रदर्शन कर रहे संगठनों का कहना है कि:
अंकिता को अब तक पूर्ण न्याय नहीं मिला है
मामले में वीआईपी और रसूखदार लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो
दोषियों को फांसी जैसी सख्त सजा दी जाए
पीड़िता के परिवार को न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा मिले
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मामले को कमजोर करने और साक्ष्यों को प्रभावित करने की कोशिशें की गईं, जिससे जनता का भरोसा न्याय व्यवस्था से डगमगाया है।
राजनीतिक बयानबाज़ी तेज
राज्य बंद के बीच विपक्षी दलों ने सरकार पर सीधा हमला बोला। नेताओं का कहना है कि सरकार ने शुरुआत से ही मामले को गंभीरता से नहीं लिया। वहीं सत्तारूढ़ दल की ओर से यह कहा गया कि:
सरकार न्याय प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं कर रही
अदालत के निर्णय का सम्मान किया जाएगा
दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा
सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम
संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल और पीएसी की तैनाती की गई है। प्रशासन ने साफ किया है कि शांतिपूर्ण विरोध की अनुमति है, लेकिन कानून हाथ में लेने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
जनता में अब भी गुस्सा
अंकिता हत्याकांड उत्तराखंड की जनता के लिए केवल एक अपराध नहीं, बल्कि बेटियों की सुरक्षा से जुड़ा सवाल बन चुका है। यही कारण है कि घटना के महीनों बाद भी लोगों का आक्रोश शांत नहीं हुआ है और राज्य बंद जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
निष्कर्ष
राज्य बंद ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि अंकिता हत्याकांड को लेकर जनता अब भी जवाब चाहती है। आने वाले दिनों में अगर सरकार और न्यायिक प्रक्रिया से ठोस परिणाम नहीं आते, तो यह आंदोलन और तेज़ हो सकता है।



